| Paper Title |
स्त्री अस्मिता का प्रश्न : वाया अक्का महादेवी |
| Author(s) | अंशिका त्रिपाठी. |
| Country | India |
| Abstract |
हिंदी साहित्य में मध्यकाल की स्त्री कवयित्री मीरा के काव्य से हम सभी परिचित हैं। मीरा के विषय में हिंदी साहित्य के इतिहास में शुक्ल जी ने भी लिखा है और विश्वविद्यालयों में मीरा को एक सशक्त एवं मध्यकाल की नारीवादी स्वर के रूप में पढ़ाया भी जाता है। जिन्होंने कृष्ण के प्रेम में लोकलाज की चिंता नहीं की और प्रेम दीवानी हो घर, संसार त्याग दिया। मीरा को पढ़ने के पहले हमें मध्यकाल और भक्ति परंपरा को समझने के लिए कन्नड़ की कवयित्री अक्का महादेवी को पढ़ना चाहिए। अक्का महादेवी का सम्बन्ध लिंगायत परम्परा से था जिसका उनके वचनों पर प्रभाव देखा जा सकता है। इस लेख में अक्का महादेवी के वचनों के माध्यम से मध्यकाल में नारी की स्थिति पर विचार किया गया है। साथ ही प्रस्तुत लेख अक्का महादेवी के रचना संसार पर भी प्रकाश डालता है। |
| Subject Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 3, Issue 1 (January - March 2026) |
| Published | 2026/01/13 |
| How to Cite | अंशिका त्रिपाठी (2026). स्त्री अस्मिता का प्रश्न : वाया अक्का महादेवी. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 1–9. |
View / Download PDF File