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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume - 3 Issue - 3 (July - September 2026)
Paper Title

हिंदी आत्मकथाओं में जीवन-संघर्ष: सामाजिक यथार्थ और आत्मानुभूति का साहित्यिक अध्ययन

Author(s) डॉ. अंजु बाला.
Country India
Abstract

हिंदी साहित्य में आत्मकथा-विधा व्यक्ति के जीवनानुभवों, संघर्षों और सामाजिक यथार्थ का सशक्त दस्तावेज़ है। आत्मकथाएँ केवल निजी जीवन का विवरण नहीं होतीं, बल्कि वे अपने समय, समाज, वर्ग, जाति और लिंग संबंधी संरचनाओं का भी विश्लेषण प्रस्तुत करती हैं। इस शोध-पत्र में मैंने हिंदी की प्रमुख आत्मकथाओं—जैसे क्या भूलूँ क्या याद करूँ, जूठन, अपने-अपने पिंजरे तथा कस्तूरी कुंडल बसे—के आधार पर जीवन-संघर्ष की प्रकृति और उसके साहित्यिक रूपांतरण का विश्लेषण करने का प्रयास किया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि हिंदी आत्मकथाएँ व्यक्तिगत वेदना को सामूहिक अनुभव में रूपांतरित कर सामाजिक परिवर्तन का आधार बनती हैं। हिंदी आत्मकथाएँ केवल साहित्यिक विधा नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण और परिवर्तन का सशक्त माध्यम हैं। आत्मकथाएँ यह भी सिखाती हैं कि संघर्ष के बावजूद मानवीय मूल्यों—सत्य, आत्मसम्मान, धैर्य और साहस—को बनाए रखना संभव है। हिंदी आत्मकथाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योकि वे हाशिए के स्वरों को केंद्र में लाती हैं। सामाजिक असमानताओं को चित्रित करती हैं। प्रतिरोध और चेतना को प्रेरित करती हैं। इतिहास को वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं और समाज में नैतिक तथा वैचारिक परिवर्तन की प्रक्रिया को गति देती हैं।हिंदी आत्मकथा साहित्य का सबसे महत्वपूर्ण तत्त्व आत्मानुभूति है, क्योंकि यही वह आधार है जिसके माध्यम से लेखक अपने जीवन के अनुभवों को साहित्यिक संवेदना और सामाजिक दृष्टि के साथ अभिव्यक्त करता है।

Subject Area हिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 1 (January - March 2026)
Published 2026/03/30
How to Cite अंजु बाला (2026). हिंदी आत्मकथाओं में जीवन-संघर्ष: सामाजिक यथार्थ और आत्मानुभूति का साहित्यिक अध्ययन. Shodh Sangam Patrika, 3(1), 140–145.

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