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Shodh Sangam Patrika

Shodh Sangam

Patrika

A National Peer-Reviewed & Refereed Quarterly Journal

  ISSN: 3049-0707 (Online)
ISSN: 3049-172X (Print)

Call For Papers - Volume - 3 Issue - 3 (July - September 2026)
Paper Title

रेहन पर रग्घू में ग्रामीण एवं आधुनिक परिवेश के बीच बनते-बिगड़ते रिश्ते

Author(s) डॉ. पुष्प लता कुमारी.
Country India
Abstract

काशीनाथ सिंह द्वारा रचित ‘रेहन पर रग्घू' अपने समय की उत्कृष्ट कृति है। यह अत्यंत गंभीर विषय एवं बदलते सामाजिक मूल्य पर आधारित उपन्यास है। आज के संदर्भ में यह उपन्यास अत्यंत प्रासंगिक है क्योंकि यह ‘व्यक्ति के अकेलेपन‘ को चरितार्थ करती है। परिस्थितिवश गाँव एवं शहर में परिवारों के दो अलग-अलग स्थानों पर रहने से आपसी समन्वय की कमी देखने को मिलती है। समयाभाव, व्यस्तता, आधुनिक जीवन की लालसा, इच्छाशक्ति में कमी एवं बात-व्यवहार के कारण व्यक्ति परिवार से दूर हो अकेलेपन का शिकार हो जाता है। उपन्यासकार ने रघुनाथ के माध्यम से उसके अकेलेपन एवं संघर्ष को दर्शाने का प्रयास किया है। परिस्थितिवश अपने भरे-पूरे परिवार जिसमें पत्नी, दो बेटे और एक बेटी होने के बावजूद भी रघुनाथ को बुर्जुगावस्था में अकेले जीवन जीने को विवश होना पड़ता है। जिस उम्र में व्यक्ति को अपने परिवार के साथ और सहयोग की आवश्यकता होती है, उस उम्र में व्यक्ति का अकेले जीवन व्यतीत करना बङा कष्टकारक होता है। ‘व्यक्ति का अकेलापन‘ आज के समाज के लिए अत्यंत सोचनीय, गंभीर एवं खतरनाक अवस्था है क्योंकि आज नयी पीढी इसी ढर्रे पर चल रही है। आज व्यक्ति को अपने बुर्जुगों से सम्मान, प्यार अपनापन और साझेदारी बना कर रखना चाहिए जिससे उनका जीवन आसानी से कट सके। काशीनाथ सिंह ने अपने उपन्यास में विविध पात्रों के माध्यम से आधुनिक जीवन की इस विङम्बना का विस्तृत विवेचन किया है।

Subject Area हिन्दी साहित्य
Issue Volume 3, Issue 2 (April - June 2026)
Published 2026/04/30
How to Cite पुष्प लता कुमारी (2026). रेहन पर रग्घू में ग्रामीण एवं आधुनिक परिवेश के बीच बनते-बिगड़ते रिश्ते. Shodh Sangam Patrika, 3(2), 7–11.

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