| Paper Title |
डॉ. रांगेय राघव के ‘देवकी का बेटा’ उपन्यास में कृष्ण-चरित की आधुनिक जीवन-दृष्टि |
| Author(s) | Dr. Surendra Kumar. |
| Country | India |
| Abstract |
हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ. रांगेय राघव ने जीवनीपरक उपन्यास-विधा को एक नवीन वैचारिक और कलात्मक आधार प्रदान किया। उनका उपन्यास ‘देवकी का बेटा’ केवल श्रीकृष्ण के जीवन की पुनर्कथा नहीं है, बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति, लोकतांत्रिक चेतना और मानवतावादी दृष्टि का आधुनिक पुनर्पाठ है। प्रस्तुत शोधपत्र में ‘देवकी का बेटा’ का जीवनीपरक उपन्यास की कसौटी पर मूल्यांकन किया गया है। इसमें उपन्यास के शीर्षक, कथानक, इतिहास-बोध, पौराणिक पुनर्व्याख्या, सांस्कृतिक परिवेश, इतिहास और कल्पना के संतुलन, चरित्र-चित्रण तथा लेखक की आधुनिक जीवन-दृष्टि का विश्लेषण किया गया है। रांगेय राघव ने कृष्ण के अलौकिक स्वरूप की अपेक्षा उनके मानवीय, संघर्षशील और जननायक रूप को प्रतिष्ठित किया है। इस प्रकार ‘देवकी का बेटा’ भारतीय सांस्कृतिक परम्परा और आधुनिक विवेकशील दृष्टि के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण सिद्ध होता है। |
| Keywords | रांगेय राघव, देवकी का बेटा, जीवनीपरक उपन्यास, कृष्ण, इतिहास, मानवतावाद, आधुनिक चेतना, पौराणिक पुनर्पाठ। |
| Subject Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 3, Issue 3 (July - September 2026) |
| Published | 2026/08/07 |
| How to Cite | Kumar, S. (2026). डॉ. रांगेय राघव के ‘देवकी का बेटा’ उपन्यास में कृष्ण-चरित की आधुनिक जीवन-दृष्टि. Shodh Sangam Patrika, 3(3), 8–13. |
View / Download PDF File